‘यह एक सीक्रेट डील’ — कर्नाटक में सीएम पद की खींचतान के बीच डीके शिवकुमार का बड़ा बयान

Chandan Bhandari
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कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव और अटकलों का दौर तेज होता जा रहा है। कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। इस बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह सार्वजनिक रूप से इस विवाद पर बोलना नहीं चाहते, क्योंकि यह पार्टी के भीतर कुछ चुनिंदा नेताओं के बीच की “सीक्रेट डील” है।

डीके शिवकुमार का बड़ा दावा: “पांच–छह लोगों की सीक्रेट डील”

मंगलवार को चल रहे विवाद के बीच डीके शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जो भी चर्चाएँ हो रही हैं, वह पूरी तरह से पार्टी के अंदरूनी स्तर पर हो रही हैं, जिसमें बहुत कम लोग शामिल हैं।
उन्होंने कहा:

“मुझे कुछ नहीं पता। मैंने कभी मुख्यमंत्री बनने के लिए नहीं कहा। यह हम पांच–छह लोगों के बीच की एक सीक्रेट डील है और मैं इसे सार्वजनिक मंच पर चर्चा नहीं करना चाहता।”

उनके इस बयान ने इस पूरे राजनीतिक विवाद को नई दिशा दे दी है।

“पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहता”

डीके शिवकुमार ने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता कांग्रेस पार्टी और उसका सम्मान है। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे पार्टी को असहज स्थिति में आना पड़े।
उन्होंने कहा:

“मैं पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहता। अगर पार्टी है, तो हम हैं। अगर कार्यकर्ता हैं, तभी हम हैं। हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा रखते हुए ही काम करना चाहिए।”

उनका यह बयान संकेत देता है कि वह अंदरखाने चल रही शक्ति संघर्ष की बात को सार्वजनिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते।

कर्नाटक में सीएम पद को लेकर क्यों बढ़ा तनाव?

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही यह चर्चा रही है कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच सत्ता संतुलन को लेकर एक अनौपचारिक समझौता हुआ था।
इस समझौते के तहत बीच कार्यकाल में नेतृत्व परिवर्तन की बात अक्सर सुर्खियों में रही है।
अब जब यह समय करीब आता दिख रहा है, तो दोनों खेमों में हलचल भी बढ़ गई है।

पार्टी के अंदर कई विधायक नेतृत्व परिवर्तन के समर्थन या विरोध में अपने-अपने गुटों के साथ खड़े दिख रहे हैं। इसी को लेकर दिल्ली में भी कई दौर की बैठकों के संकेत मिल रहे हैं।

सिद्धारमैया पर दिया बड़ा बयान

अपने निर्वाचन क्षेत्र कनकपुरा के दौरे पर निकलने से पहले डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बारे में भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
उन्होंने कहा:

“मुख्यमंत्री सिद्धारमैया वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के लिए एक असेट हैं। उन्होंने सात साल से अधिक समय तक राज्य का नेतृत्व किया है।”

उनकी यह बात दर्शाती है कि वह सिद्धारमैया के खिलाफ कोई सीधी टिप्पणी नहीं करना चाहते। लेकिन यह भी साफ है कि पार्टी में नेतृत्व संबंधी फैसला अब हाईकमान के स्तर पर पहुंच चुका है।

विधायकों के दिल्ली जाने पर क्या बोले?

इस विवाद के बीच कई विधायकों के दिल्ली जाने की खबरें सामने आई थीं। माना जा रहा था कि ये विधायक या तो नेतृत्व परिवर्तन का समर्थन जुटा रहे हैं या मंत्री पद के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।
जब इस मामले पर डीके शिवकुमार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा:

“मुझे नहीं पता कि विधायक दिल्ली क्यों गए हैं। मैंने किसी को कॉल नहीं किया, न ही उनसे पूछा। शायद वे अपने लिए मंत्री पद या दूसरी जिम्मेदारियाँ पाने की कोशिश में हों।”

उनके इस बयान से यह स्पष्ट है कि वे इस मुद्दे से खुद को दूर रख रहे हैं और किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं करना चाहते।

कांग्रेस हाईकमान की भूमिका और बढ़ा दबाव

कर्नाटक की राजनीति में जो तस्वीर बन रही है, उससे यह साफ है कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को ही लेना होगा।
विधायकों के दोनों खेमों की सक्रियता, मीडिया में चल रही रिपोर्टें और बढ़ती बयानबाज़ी से पार्टी के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है।

हाईकमान पर अब यह दबाव है कि:

  • सरकार अस्थिर न हो 
  • दोनों बड़े नेताओं के बीच संतुलन बना रहे 
  • संगठन के भीतर किसी तरह का विद्रोह न पनपे 

इस स्थिति को देखकर यह भी लगता है कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर सार्वजनिक विवाद से बचना चाहती है। शायद यही वजह है कि डीके शिवकुमार भी लगातार बोलने से बच रहे हैं।

सत्ता की सियासत और भविष्य की तस्वीर

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक कुछ विधायक खुले तौर पर अपने-अपने नेताओं के समर्थन में सक्रिय हैं।
दूसरी ओर, सिद्धारमैया खेमे में भी यह मान्यता है कि उनका शासन स्थिर है और चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन भी मजबूत रहा है।

वहीं, शिवकुमार समर्थक लंबे समय से यह उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलेगा।
अब “सीक्रेट डील” वाला उनका बयान पूरे समीकरण को और दिलचस्प बना देता है।

क्या कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन होगा?

फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
लेकिन घटनाक्रम से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि:

  • पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर बातचीत जारी है 
  • दबाव दोनों तरफ से मौजूद है 
  • हाईकमान जल्द किसी निष्कर्ष पर पहुँचना चाहता है 

आने वाले दिनों में दिल्ली और बेंगलुरु दोनों जगहों पर राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है।

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