भारत और साउथ अफ्रीका के बीच रायपुर में खेले गए दूसरे वनडे मैच के दौरान एक बेहद गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई जिसने क्रिकेट प्रेमियों के साथ-साथ प्रशासन की भी चिंता बढ़ा दी। मुकाबले के दौरान मैदान और खिलाड़ियों की सुरक्षा ऐसे बाउंसर्स को सौंपी गई थी जिन पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे। इसी बीच विराट कोहली के पैर छूने मैदान के भीतर घुस आए एक फैन की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए। क्या यह सिर्फ जुनून था या इसके पीछे सुरक्षा में बड़ी लापरवाही और खिलाड़ियों की लोकेशन लीक होने जैसी वजहें छिपी थीं? जांच में जिस नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वह था वसीम बाबू—एक ऐसा बाउंसर जिस पर खुद अपराधिक मामलों का रिकॉर्ड बताया जा रहा है और जिसकी गतिविधियों ने पूरे आयोजन की सुरक्षा प्रणाली की पोल खोल दी।
कैसे सामने आई सुरक्षा में बड़ी सेंध?
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मुकाबले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का दावा बड़ा मजबूत किया गया था, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। मैच کے दौरान जिन बाउंसर्स को खिलाड़ियों की सुरक्षा में तैनात किया गया, वे शहर के मौदहापारा और खम्हारडीह थाना क्षेत्रों में दर्ज कई आपराधिक मामलों से जुड़े बताए गए। मतलब, जिन पर आम नागरिक भरोसा नहीं करता, उन्हीं के हाथ में देश के स्टार खिलाड़ियों और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा सौंप दी गई।
जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, सवाल उठने लगे कि आखिर इतनी बड़ी प्रतियोगिता में पेशेवर पुलिस या प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की जगह संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले लोगों को क्यों लगाया गया। यह सीधा-सीधा सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन था, जिससे किसी भी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ था।
वसीम बाबू कौन है और आरोप क्या हैं?
मामले के केंद्र में बाउंसर वसीम बाबू का नाम सामने आया, जिस पर आरोप है कि उसने न सिर्फ ड्यूटी के दौरान अनुशासन तोड़ा, बल्कि खिलाड़ियों की मूवमेंट और लोकेशन को सोशल मीडिया के जरिए लीक किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वसीम और उसके साथी बाउंसर खिलाड़ियों के आने-जाने के दौरान मोबाइल से वीडियो और रील बना रहे थे। इन वीडियो में खिलाड़ियों की पहचान और उस वक्त की सटीक लोकेशन साफ दिख रही थी।
यह बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है, क्योंकि किसी भी बड़े खिलाड़ी के मूवमेंट की रीयल-टाइम जानकारी सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकती है। अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में आम तौर पर यही पहली शर्त होती है कि खिलाड़ियों की लोकेशन सार्वजनिक न हो सके, लेकिन यहां पर नियमों की खुल्लमखुल्ला अनदेखी हुई।
विराट कोहली के पैर छूने वाला फैन: जुनून या सुरक्षा में गड़बड़ी?
मैच के दौरान एक युवक सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे मैदान में घुस आया और विराट कोहली के पैर छू लिए। टीवी पर यह इमोशनल पल देखकर कई लोग भावुक भी हुए, लेकिन बाद में यही घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल बन गई।
अधिकारियों ने तुरंत युवक को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन असली मुद्दा यह रहा कि वह युवक मैदान तक पहुंचा कैसे? जोन सिक्योरिटी, बाउंसर कॉर्डन और पुलिस पंक्ति—सबको पार कर जाना यह दिखाता है कि सुरक्षा व्यवस्था कहीं न कहीं पूरी तरह ढीली पड़ चुकी थी।
चर्चा यह भी तेज हुई कि क्या मैदान के भीतर मौजूद बाउंसर्स की वजह से ही उस फैन को रास्ता मिला? कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स का दावा है कि खिलाड़ियों की लोकेशन और मूवमेंट पहले ही सोशल मीडिया से सार्वजनिक हो चुकी थी, जिससे ऐसे घुसपैठियों को सही समय और जगह की जानकारी मिल सकती थी।
ड्यूटी पर सेल्फी और रील—सुरक्षा की उड़ाई धज्जियां
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जिनका काम खिलाड़ियों की सुरक्षा करना था, वही बाउंसर उनके साथ सेल्फी और रील बनाने में व्यस्त नजर आए। कई बाउंसर्स खिलाड़ियों के पीछे-पीछे चलते हुए वीडियो शूट कर रहे थे—जिसे सोशल मीडिया पर तुरंत अपलोड भी किया गया।
यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधा-सीधा सुरक्षा खतरा भी पैदा करता है। किसी भी बड़े इवेंट में खिलाड़ियों के आसपास मोबाइल फोन का इस्तेमाल सख्ती से सीमित किया जाता है ताकि लाइव लोकेशन लीक न हो। यहां उल्टा वही लोग नियम तोड़ रहे थे, जिन्हें नियमों की रक्षा करनी थी।
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ और BCCI पर सवाल
घटना सामने आने के बाद सबसे ज्यादा निशाना छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ और अप्रत्यक्ष रूप से BCCI पर साधा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि—
- बाउंसर्स की बैकग्राउंड जांच क्यों नहीं की गई?
- क्या पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था या सिर्फ स्थानीय एजेंसियों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया गया?
- एक अंतरराष्ट्रीय मैच में सुरक्षा का जिम्मा ऐसे लोगों को कैसे दे दिया गया जिन पर पहले से आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं?
अब तक संघ या शीर्ष अधिकारियों की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और बढ़ता जा रहा है। लोगों का मानना है कि इतने बड़े आयोजन में ऐसी लापरवाही माफ करने लायक नहीं है।
फ्री पास विवाद से और बढ़ी नाराजगी
सिक्योरिटी विवाद के साथ एक और मामला सामने आया—फ्री पास वितरण का। स्थानीय स्तर पर आरोप लगे कि क्रिकेट संघ के कुछ पदाधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और जान-पहचान वालों में बड़ी संख्या में फ्री पास बांट दिए।
इस वजह से जो आम दर्शक लाइन में लगकर महंगे टिकट खरीदे थे, उन्हें स्टेडियम के बाहर हंगामा करते देखा गया, क्योंकि उनकी सीटों पर पहले से फ्री पास वाले लोग बैठ चुके थे। इससे आम जनता में नाराजगी फैल गई और पूरे आयोजन की छवि पर भी सवाल उठे।
रायपुर में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच और पहला विवाद
BCCI के हैंडओवर के बाद रायपुर में यह पहला अंतरराष्ट्रीय मैच था। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद थी कि शहर में इंटरनेशनल क्रिकेट का शानदार आगाज़ होगा, लेकिन सुरक्षा चूक और फ्री पास विवाद ने इस ऐतिहासिक मौके को विवादों में घेर दिया।
एक तरफ शानदार मैच और क्रिकेट का रोमांच था, वहीं दूसरी तरफ आयोजन की अव्यवस्था ने सारा फोकस हटा दिया। सुरक्षा में चूक का मुद्दा अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच चुका है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
रायपुर की इस घटना ने भारत में इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक कड़ा सबक दिया है। खिलाड़ियों की सुरक्षा केवल बाउंसर्स या अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। जरूरी है कि—
- हर सुरक्षाकर्मी का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हो।
- सोशल मीडिया पर लाइव रील्स या पोस्ट डालने पर सख्त पाबंदी हो।
- मैदान के भीतर दर्शकों की आवाजाही पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी लागू की जाए।
- फ्री पास वितरण सहित टिकटिंग सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
निष्कर्ष
रायपुर वनडे के दौरान सामने आई यह सुरक्षा चूक सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता को उजागर करती है। वसीम बाबू जैसे बाउंसरों पर लग रहे आरोप, खिलाड़ियों की लोकेशन लीक करने वाली गतिविधियां, और मैदान में घुसकर विराट कोहली के पैर छूने की घटना—ये सब एक-दूसरे से जुड़े हुए नजर आते हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे का खतरा भी बना रह सकता है। इंटरनेशनल क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, राष्ट्र की प्रतिष्ठा से जुड़ा आयोजन होता है—और इसकी सुरक्षा में कोई भी समझौता पूरे देश की छवि पर असर डाल सकता है।
