मैग्नेट वायर बनाने वाली प्रमुख कंपनी KSH International के शेयरों ने शेयर बाजार में उम्मीद के मुताबिक शुरुआत नहीं की। लंबे समय से जिस आईपीओ का इंतजार किया जा रहा था, वह लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को निराश करता दिखा। ₹384 के इश्यू प्राइस पर आए इस आईपीओ के शेयर BSE और NSE दोनों पर करीब 3% डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुए। कमजोर लिस्टिंग ने साफ कर दिया कि बाजार की धारणा इस इश्यू को लेकर पहले से ही सतर्क थी। आईपीओ को सब्सक्रिप्शन के दौरान भी ठंडा रिस्पॉन्स मिला था, जिसका असर लिस्टिंग पर साफ नजर आया।
3% डिस्काउंट पर हुई KSH International की लिस्टिंग
KSH International के शेयरों ने शेयर बाजार में ₹370 के स्तर पर एंट्री ली। यह इश्यू प्राइस ₹384 के मुकाबले करीब 3.65% की गिरावट को दर्शाता है। लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद शेयरों पर और दबाव देखने को मिला और कीमत ₹358.70 तक फिसल गई। इस स्तर पर आईपीओ निवेशक करीब 6.5% के नुकसान में आ गए।
लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी बेहद कमजोर था, जिससे पहले ही संकेत मिल गया था कि इस आईपीओ से निवेशकों को शॉर्ट टर्म में कोई बड़ा फायदा मिलने की संभावना कम है।
IPO को क्यों मिला ठंडा रिस्पॉन्स?
₹644 करोड़ के इस आईपीओ को सब्सक्रिप्शन के दौरान भी निवेशकों का खास उत्साह नहीं मिला। यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब तक नहीं हो पाया और कुल मिलाकर सिर्फ 0.87 गुना ही भर सका।
सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा कुछ इस तरह रहा:
- QIB (Qualified Institutional Buyers): 1.12 गुना
- NII (Non-Institutional Investors): 0.44 गुना
- Retail Investors: 0.91 गुना
इन आंकड़ों से साफ है कि न तो रिटेल निवेशकों ने और न ही बड़े निवेशकों ने इस आईपीओ पर पूरा भरोसा दिखाया। कमजोर सब्सक्रिप्शन ने लिस्टिंग के समय दबाव को और बढ़ा दिया।
IPO से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कहां होगा?
KSH International के आईपीओ में ₹420 करोड़ के नए शेयर जारी किए गए थे, जबकि शेष हिस्से में ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत 58,45,001 शेयर बेचे गए।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नए शेयरों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:
- ₹225.98 करोड़: कर्ज कम करने के लिए
- ₹87.02 करोड़: दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में नई मशीनरी और सेटअप
- ₹8.83 करोड़: सुपा फैसिलिटी में रूफटॉप सोलर पावर प्लांट
- बाकी राशि: सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए
OFS के जरिए मिली रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरहोल्डर्स को गई है, कंपनी के पास नहीं।
KSH International क्या करती है?
1979 में स्थापित KSH International देश की तीसरी सबसे बड़ी मैग्नेट वायर निर्माता कंपनी है, जबकि निर्यात के मामले में यह भारत की सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है। कंपनी ‘KSH’ ब्रांड नाम के तहत काम करती है और कई अहम सेक्टर्स को अपनी सेवाएं देती है।
कंपनी के प्रमुख ग्राहक सेक्टर:
- पावर और रिन्यूएबल एनर्जी
- रेलवे
- ऑटोमोटिव
- इंडस्ट्रियल OEMs
KSH International देश की बड़ी सरकारी कंपनियों जैसे Power Grid और NTPC को भी सप्लाई करती है। इसके अलावा कंपनी अमेरिका, जर्मनी, यूएई और जापान समेत 24 देशों में एक्सपोर्ट करती है।
मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज और विस्तार योजनाएं
KSH International की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स महाराष्ट्र में स्थित हैं:
- तलोजा और चाकन में 3 प्लांट
- अहिल्यानगर (सुपा) में चौथा प्लांट निर्माणाधीन
कंपनी आईपीओ से मिली रकम के जरिए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और तकनीक को अपग्रेड करने की योजना बना रही है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति कितनी मजबूत है?
अगर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें, तो KSH International ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत ग्रोथ दिखाई है।
शुद्ध मुनाफा:
- FY23: ₹26.61 करोड़
- FY24: ₹37.35 करोड़
- FY25: ₹67.99 करोड़
कुल आय:
- FY25 में कंपनी की टोटल इनकम बढ़कर ₹1,938.19 करोड़ पहुंच गई
- आय में सालाना 35% से अधिक CAGR दर्ज किया गया
चालू वित्त वर्ष (FY26):
- अप्रैल–जून 2025 तिमाही में
- शुद्ध मुनाफा: ₹22.68 करोड़
- कुल आय: ₹562.60 करोड़
जून 2025 के अंत तक कंपनी पर ₹379.39 करोड़ का कर्ज था, जबकि ₹293.07 करोड़ रिजर्व और सरप्लस के रूप में मौजूद थे।
लिस्टिंग भले कमजोर, लेकिन लंबी अवधि में क्या है संभावना?
हालांकि KSH International की लिस्टिंग निराशाजनक रही, लेकिन कंपनी का बिजनेस मॉडल, मजबूत एक्सपोर्ट नेटवर्क और लगातार बढ़ता मुनाफा लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए दिलचस्प हो सकता है। कर्ज घटाने और कैपेसिटी विस्तार की योजना भविष्य में कंपनी के मार्जिन और कैश फ्लो को बेहतर बना सकती है।
हालांकि, मौजूदा बाजार हालात और कमजोर लिस्टिंग को देखते हुए शॉर्ट टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष
KSH International IPO से निवेशकों को लिस्टिंग गेन तो नहीं मिला, लेकिन कंपनी की मजबूत फंडामेंटल स्थिति इसे लंबी अवधि में एक संभावित दांव बना सकती है। कमजोर बाजार भावना और सब्सक्रिप्शन के कारण शुरुआती झटका जरूर लगा है, लेकिन आगे का प्रदर्शन कंपनी की ग्रोथ और मैनेजमेंट की रणनीति पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
