भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों की साझेदारी को एक नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा जारी संयुक्त बयान में वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही व्यापार को रुपया–रुबल जैसे राष्ट्रीय मुद्राओं में सेटल करने पर सहमति बनी है, जो डॉलर पर निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। डिफेंस, न्यूक्लियर, स्पेस, एनर्जी, आतंकवाद, कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में करीब 70 समझौतों पर सहयोग को लेकर सहमति बनी है।
भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 साल
साल 2000 में भारत और रूस ने रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की थी, जिसे अब 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने इस रिश्ते को “आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित साझेदारी” बताया। दोनों देशों ने वैश्विक मंच पर बहुध्रुवीय (Multi-polar) विश्व व्यवस्था की आवश्यकता दोहराई और कहा कि भारत-रूस सहयोग वैश्विक स्थिरता का आधार बन सकता है।
डिफेंस सेक्टर: ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी मजबूती
सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर
रक्षा क्षेत्र में अब रिश्ता केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देश Co-Development और Co-Production यानी संयुक्त विकास व उत्पादन पर काम करेंगे।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT)
रूस भारत में:
- सैन्य स्पेयर पार्ट्स
- कंपोनेंट्स
- उपकरणों के एग्रीगेट्स
का निर्माण करेगा।
इससे भारत की रक्षा सप्लाई चेन आत्मनिर्भर बनेगी और भविष्य में निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।
ट्रेड और फाइनेंस: डॉलर के बजाय रुपया-रुबल मॉडल
भारत और रूस ने 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य तय किया है, लेकिन खास बात यह है कि व्यापार का निपटान:
👉 अमेरिकी डॉलर की बजाय
👉 रुपया और रूबल जैसी राष्ट्रीय मुद्राओं में होगा।
दोनों देशों ने अपने-अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम (UPI और MIR) को आपस में जोड़ने की दिशा में काम शुरू करने पर सहमति दी है।
EAEU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत तेज़ होगी, जिससे रूस के साथ-साथ मध्य एशिया के बाजार भारत के लिए खुलेंगे।
न्यूक्लियर और एनर्जी सहयोग
कुडनकुलम परियोजना
- कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट पर काम तेज़ किया जाएगा
- भारत में एक दूसरी न्यूक्लियर साइट पर भी सहमति बनी
न्यूक्लियर टारगेट
रूस की मदद से भारत को 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने में सहयोग मिलेगा।
अन्य ऊर्जा सहयोग
- तेल और गैस की लंबी अवधि सप्लाई गारंटी
- उर्वरक (Fertilizers) सप्लाई
- कोयला गैसीफिकेशन
- पेट्रोकेमिकल्स
आर्कटिक और रूसी सुदूर पूर्व में भारत की भागीदारी
रूस ने भारत को:
- आर्कटिक रीजन
- Russian Far East
में ऊर्जा और खनिज संसाधनों की खोज में साझेदारी करने की पेशकश की है। यह क्षेत्र तेल, गैस और क्रिटिकल मिनरल्स से समृद्ध है।
कनेक्टिविटी: नए व्यापारिक मार्ग
चेन्नई–व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर
यह समुद्री मार्ग भारत को सीधे रूस से जोड़ेगा, जिससे माल परिवहन तेज़ और सस्ता होगा।
नॉर्दर्न सी रूट
यह आर्कटिक मार्ग यूरोप तक जाने के रास्ते को काफी छोटा करेगा।
INSTC नेटवर्क
इंटरनेशल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) को मजबूत कर भारत, ईरान, मध्य एशिया व यूरोप तक सीधी पहुंच बनाएगा।
आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’
संयुक्त बयान में:
- पहलगाम आतंकी हमला
- मॉस्को क्रोकस सिटी हॉल हमला
की कड़ी निंदा की गई।
भारत और रूस ने:
✅ आतंकवाद पर “Zero Tolerance”
✅ टेरर फाइनेंसिंग पर कार्रवाई
✅ सीमा पार आतंक के खिलाफ सहयोग
की प्रतिबद्धता दोहराई।
UNSC में भारत को मिला रूस का समर्थन
रूस ने:
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन दोहराया।
- भारत के Nuclear Suppliers Group (NSG) में प्रवेश को भी समर्थन दिया।
स्पेस सहयोग
ISRO और Roscosmos मिलकर काम करेंगे:
- गगनयान मिशन
- मानव अंतरिक्ष उड़ान
- रॉकेट इंजन विकास
- ग्रहों की खोज
तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स
भारत और रूस साथ मिलकर:
- लिथियम व कोबाल्ट
- रेयर अर्थ मिनरल्स
- क्वांटम कम्प्यूटिंग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- साइबर सिक्योरिटी
पर अनुसंधान व उत्पादन बढ़ाएंगे।
अगला शिखर सम्मेलन
👉 24वां भारत-रूस शिखर सम्मेलन 2026 में मॉस्को में आयोजित होगा।
पीएम मोदी ने पुतिन का न्योता स्वीकार कर लिया है।
निष्कर्ष
रुपया-रुबल पैक्ट के साथ रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सहयोग में विस्तार ने भारत-रूस संबंधों को नई दिशा दी है। करीब 70 समझौते दोनों देशों को न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भी और मजबूत बनाते हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक ताकत बनने के लक्ष्य में बड़ी भूमिका निभाने वाली है
